BIOMETRIC REVOLUTION IN INDIA – SAFE – UNSAFE

दुनिया में बायोमेट्रिक सुविधा को अपनाने वाले देशों में भारत सबसे आगे है..!

लेकिन क्या भारत में बायोमेट्रिक सुविधा पर्याप्त सुरक्षित है?

एचएसबीसी ने प्रौद्योगिकी में, बायोमेट्रिक सुविधा के विश्वसनीयता के पहलू पर अभी हालिया  एक दिलचस्प रिपोर्ट लॉन्च की है। 11 देशों (कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, भारत, मैक्सिको, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका) के 12,000 लोगों के उनकी आदतें और प्रतिदिन जीवन में प्रौद्योगिकी से संबंधित धारणाएं पर आधारित सर्वेक्षण के बाद, ‘ट्रस्ट इन टेक्नोलॉजी’ (Trust in Technology) शीर्षक से रिपोर्ट तैयार की गई है।

इस रिपोर्ट से ज्ञात होता है की हर क्षेत्र में, तकनिकी और प्रौद्योगिकी के उपयोग के मामले में भारत ने अन्य सभी देशों को मात कर दिया है।

लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा है जिसका जवाब आना अभी बाकि है और वो सवाल है की, क्या हम सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं? क्या हमने अपने डेटा को सुरक्षित रखा है?

रिपोर्ट में पाया गया है कि भारतीयों को आईरिस स्कैन का इस्तेमाल करने की संभावना तीन गुना अधिक है, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सुरक्षा की मंजूरी और गारंटी का एक तरीका है, और अपने स्वयं की पहचान प्रदर्शित करने के लिए भी आवश्यक है । आईरिस स्कैन का उपयोग करने के लिए 9% भारतीय ठीक हैं, जो विश्व स्तर पर केवल 3% है।

इसका मतलब यह है कि जब जैव प्रौद्योगिकी को अपनाने की बात आती है, तो भारत में इसे अपनाने की गति और उत्सुकता बेजोड़ प्रतीत होती है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, जब फिंगरप्रिंट तकनीक को अपनाने की बात आती है, तो चीनी 40% उत्तरदाताओं के साथ कह रहे हैं कि वे इसके साथ ठीक हैं, जबकि 31% भारत से और 25% यूएई से कह रहे हैं कि वे इस तकनीक को अपनाने के लिए तैयार हैं ।

वास्तव में, इस रिपोर्ट ने आश्चर्यजनक रूप से खुलासा किया की संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के पश्चिमी देशों की तुलना में एशियाई देशों के लोग पहचान की बायोमेट्रिक तकनीक का उपयोग करने की अधिक संभावना रखते हैं , जो की इस तकनीक को पासवर्ड के विकल्प के रूप में उपयोग करने की अधिक संभावना रखते हैं।

एचएसबीसी इंडिया रिटेल बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट के प्रमुख रामकृष्णन एस ने कहा है कि ” पूर्वी देशों में रहने वाले उपभोक्ताओं को उभरती हुई प्रौद्योगिकी की बेहतर समझ और उस पर अधिक विश्वास होना चाहिए, और इस बात की परख होनी चाहिए की यह तकनीक कैसे उनके जीवन को फायदा पहुंचा सकती है। तकनिकी परिवर्तन की गति और उसे अपनाने की उत्सुकता दर ने भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात की पसंद को पश्चिमी बाजारों से आगे बढ़ाया, ”

और संकलित डेटा यह साबित करता है कि जर्मनी में स्मार्टफोन / टैबलेट आधारित बैंकिंग की न्यूनतम दर 4% है, जबकि हांगकांग में 9% और संयुक्त अरब अमीरात में 15% ने कहा है कि वे अपने स्मार्टफ़ोन पर बैंकिंग करते हैं।

अगर हम पैसे प्रबंधन लेते हैं, तो सर्वेक्षण में आए 50% भारतीयों ने स्वीकार किया है कि इंसान की तुलना में कंप्यूटर बेहतर सलाह प्रदान कर सकते हैं, लेकिन जब यही बात कनाडा के नागरिकों से पूची गयी, तो केवल 18% ने ऑनलाइन पेमेंट मोड से पेमेंट करने की बात स्वीकारी है, और यूके में केवल 21% लोग पैसे से सम्बंधित प्रबंधन के मामलों में मुनष्य की तुलना में कंप्यूटर पर अधिक विश्वास करना बताते हैं..!

यहां आप पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं।

लेकिन, क्या भारतीय होने के नाते हम सुरक्षा मानकों को अनदेखा कर रहे हैं?

हाल ही में एयरटेल रिटेलर के एक नए मामले में एयरटेल पेमेंट बैंक को जबरदस्ती रूप से खोलने का एक अनोखे मामला में ग्राहक के सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर दिया गया था। इस घटनाक्रम में एयरटेल कर्मचारी ने उंगलियों के निशान को बायोमैट्रिक स्कैन करने के बाद, अनैतिक रूप से उपयोगकर्ता के एक नए बैंक खाते को खोला जो की एयरटेल पेमेंट बैंक के रूप में काम करेगा, इस मामले में गराहक सिर्फ अपने एयरटेल मोबाइल नंबर के साथ आधार जोड़ने के लिए चाहते थे लेकिन एयरटेल कर्मचारी ने अनधिकृत रूप से ग्राहक को बिना बताये उनका एयरटेल पेमेंट बैंक का खाता खोल दिया था।

निकट भविष्य में हम आपको बताएँगे कि कैसे बायोमेट्रिक आधारित आधार डेटा इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से साझा किया जा रहा है , सरकारी आंकड़ों से जुड़े क्रयाकलाप करने वाली शीर्ष संथाओं के बाबु से लेकर उच्च अधिकारीयों तक इस प्रकार की धांधली में लिप्त हो सकते हैं, क्यूँ की बगैर मिलीभगत के इस तरह सुरक्षित डाटा इतनी आसानी से लीक होना संभव नहीं है। निचे दिए गए चित्र में आप देख सकते हैं की किस प्रकार गूगल में सर्च के माध्यम से आधार डाटा खोजा जा रहा है।

Aadhar Data
A Simple Google Search will Reveal numbers of Aadhar Data

हालांकि सरकारी मशीनरी का स्पष्ट रूप से दुरूपयोग हुआ है और आधार डेटा (जिसमें बायोमेट्रिक जानकारी के अलावा अन्य महत्वपूर्ण विवरण भी शामिल हैं) को जानबूझ कर लीक किया है, जो कि आधार सम्बन्धी कानून के तहत दंडनीय अपराध है। धोखाधड़ी का स्तर भारत भर में बढ़ रहा है, और डेटा की चोरी कर के उसका दुरूपयोग कर मानसिक शोषण किया जा रहा है।

इस तरह के या तकनिकी विज्ञानं से जुड़े अपराधों के बारे में हम आगले किसी लेख में विस्तार से बात करेंगे ताकि हमारे पाठक अपने हितों के लिए सजग रह सकें।

बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी की बढ़ती संख्या को देखते हुए लग रहा है की भारतीय काफी आशावादी हैं। लेकिन उस डेटा की सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण है, जो की पूर्णतया सरकारी जिम्मेदारी है।

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